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प्राकृतिक चिकित्सा एक उपचार पद्धति ही नहीं बल्कि मनुष्य शरीर में प्राकृतिक शक्ति को उत्पादित कर, शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक और पर्यावरणीय कारकों सहित व्यक्ति के सभी क्रिया-कलाप पर प्रभाव डालती है। जब व्यक्ति किसी साध्य अथवा असाध्य रोग से जूझ रहा हो, तो सदैव उसे किसी चिकित्सक की स्मृति होती है जो उसे रोग से मुक्ति दिला सके।
प्राकृतिक चिकित्सा में रोग का उपचार के लिए शरीर को अपनी ही शक्ति का उपयोग किया जाता है। यह पद्धति समग्र उपचार है जो शरीर को संतुलन के लिए पृथ्वी, वायु, जल, अग्नि और आकाश जैसे पंचतत्वों का उचित उपयोग करती है।
यदि किसी मनुष्य को रोग से हार का भय हो तो प्राकृतिक चिकित्सा उसका एकमात्र साधन है। चिकित्सक शरीर, मन और आत्मा पर ध्यान केंद्रित करते हुए लक्षणों के मूल कारण को देखते हुए रोगी के उपचार का दृष्टिकोण अपनाते हैं। शरीर से विजातीय तत्वों को बाहर निकालना और अच्छा आहार-विहार ही उत्तम स्वास्थ्य की ओर ले जाता है।
ॐ धन्वंतराये नमः।
आयुर्वेद के जनक, देवता, संरक्षक श्री भगवान धन्वन्तरि जी के आशीर्वाद से "भगवान धन्वन्तरि धाम अनुसंधान संस्थान" प्राकृतिक चिकित्सा, आयुर्वेद, योग साधना, मानव सेवा एवं प्राकृतिक पर्यटन केन्द्र के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहा है। संसार के प्रत्येक परिवार को अच्छा स्वास्थ्य और उत्तम सेवाएँ प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
जल चिकित्सा शरीर की शुद्धि और ऊर्जा संतुलन का श्रेष्ठ साधन है। ठंडे, गर्म और भाप उपचार के माध्यम से तनाव कम होता है, रक्त संचार बढ़ता है और शरीर की र्यक्षमता में सुधार होता है। यह उपचार मांसपेशियों की जकड़न को दूर करता है और त्वचा को नई चमक प्रदान करता है।
उपयोग: स्टीम बाथ, हाइड्रो बाथ, हॉट-कोल्ड पैक और फुट बाथ।
लाभ: डिटॉक्सिफिकेशन, त्वचा निखार, नींद में सुधार और थकान से राहत।
मिट्टी में प्राकृतिक ठंडक और खनिज तत्व होते हैं जो शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालते हैं। यह त्वचा की चमक बढ़ाने, सूजन कम करने और रक्त संचार को बढ़ाने में सहायक है।
उपयोग: मड पैक, मड बाथ, मड रैप्स।
लाभ: त्वचा रोगों में राहत, मानसिक शांति और शरीर की अशुद्धियों का
निष्कासन।
सूर्य के प्रकाश से शरीर को जीवनदायिनी ऊर्जा मिलती है। सूर्य स्नान से विटामिन D का निर्माण होता है, जिससे हड्डियाँ मजबूत होती हैं और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
उपयोग: सूर्योदय के समय 15–20 मिनट सूर्य स्नान।
लाभ: डिप्रेशन में राहत, रक्तचाप संतुलन, और मनोबल वृद्धि।
यह प्राचीन चीनी पद्धति शरीर के विशेष बिंदुओं पर सूक्ष्म सूई लगाने से शरीर की ऊर्जा को संतुलित करती है। इससे दर्द निवारण, पाचन सुधार और मानसिक शांति प्राप्त होती है।
उपयोग: माइग्रेन, पीठ दर्द, गठिया और तनाव के उपचार में।
लाभ: शरीर की ऊर्जा प्रणाली में संतुलन और प्राकृतिक उपचार की प्रक्रिया
को सक्रिय करना।
आयुर्वेद की यह अनोखी पद्धति माथे पर निरंतर तेल की धारा डालकर मस्तिष्क को शीतलता प्रदान करती है। यह तनाव, अनिद्रा, सिरदर्द और मानसिक अस्थिरता को दूर करने में अत्यंत प्रभावी है।
लाभ: डीप रिलैक्सेशन, स्लीप क्वालिटी में सुधार और मानसिक शांति का अनुभव।
योग आसनों, ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से शरीर-मन का संतुलन स्थापित करता है। यह न केवल स्वास्थ्य सुधारता है बल्कि आत्मिक जागरूकता और स्थिरता भी प्रदान करता है।
लाभ: शरीर की लचीलापन, तनावमुक्त जीवन और रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि।
प्राणायाम श्वास नियंत्रण की कला है जो शरीर में प्राण ऊर्जा का संचार करती है। नियमित अभ्यास से मन शांत होता है, हृदय मजबूत बनता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है।
प्रमुख प्रकार: अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, कपालभाति, उद्गीत।
लाभ: मानसिक शांति, रक्त संचार में सुधार और लंबी आयु।
“भगवान धन्वन्तरि धाम” का उद्देश्य है —
संपूर्ण स्वास्थ्य, संतुलित जीवन और प्रकृति के
साथ सामंजस्य।
यहाँ हर उपचार आपको स्वयं से जोड़ता है, ताकि जीवन में शांति, संतुलन और स्वास्थ्य बना रहे।